पवित्र मन में ही विराजते हैं भगवान : संजीव आकांक्षी
स्वामी नारदानन्द ऋषि आश्रम में संपन्न हुआ 91वां भंडारा


फसी उर रहमान बेग (संपादक)मुरादाबाद. स्वामी नारदानंद ऋषि आश्रम में संपन्न हुए 91वें भंडारा के आयोजन पर मंगल चिंतन में बाबा संजीव आकांक्षी ने कहा कि पवित्र भाव से ही प्रभु प्राप्त होते हैं.
जिस प्रकार से शुद्ध भोजन के लिए रसोई का शुद्ध होना बहुत
आवश्यक है. भोजन पकाने के लिए भी भोजन सामग्री का पवित्र और साफ सुथरा होना आवश्यक है, और आप अपने घर में भी जब पूजा पाठ करते हैं तो भगवान के लिए साफ, स्वच्छ, पवित्र आसन ही लगते हैं, सजाते हैं.
ऐसे में जरा चिंतन कीजिए हमारे अंतःकरण में सांसारिक विषय भोग का न जाने कितना कचरा हमने अपने मन- मस्तिष्क और हृदय में भर रखा है. लोगों के प्रति द्वेष, पाप चिंतन, विषय भोगों का चिंतन, क्या ऐसे पवित्र मन और पवित्र हृदय में परमात्मा किसी भी रूप में वास कर सकते हैं. परमात्मा तो ऐसे हृदय, ऐसे मस्तिष्क से, ऐसे चिंतन के आसपास फटकेंगे भी नहीं.
अतः मनुष्य को चाहिए कि हमारा अंतकरण निश्चल हो, पवित्र हो, साफ सुथरा हो और यह सब वैचारिक साफ-सुथरापन, हमारे शब्दों का आचरण का साफ सुथरापन, हमारे भावों का साफ सुथरापन होना चाहिए, और जब हमारा अंतःकरण शुद्ध पवित्र हो जाएगा, तब हम भगवान का स्मरण करेंगे, भगवान का आवाहन करेंगे तो उस परम सत्ता के आगमन के लिए तत्पर होंगे. भगवान हमारे अंतःकरण में अवश्य ही स्थापित होंगे और हमारा जीवन शुद्ध, सिद्ध और सरल होगा. हम इस मानव जीवन में जिस अभीष्ट की प्राप्ति के लिए आए हैं वह भी हमें प्राप्त होगा.
मनुष्य को चाहिए की पवित्र भाव रखते हुए सात्विक कार्यों में निरंतर लगे रहे.
मंगल चिंतन के उपरांत भंडारे का आयोजन किया गया भंडारे में नवीन रोहिल्ला, प्रेमनाथ यादव पंकज शर्मा, बाबा संजीव आकांक्षी, प्रमोद रस्तोगी, सुमन गुप्ता आदि का विशेष प्रकार से सहयोग रहा.





























