विधान परिषद की वित्तीय एवं प्रशासकीय विलंब समिति के मा. सभापति डॉ. रतन पाल सिंह ने अधिकारियों के साथ की बैठक
सेवानिवृत्त कार्मिकों के देयकों का प्राथमिकता के साथ भुगतान कराने के दिए निर्देश

फसी उर रहमान बेग (जनता और जनादेश)उत्तर प्रदेश विधान परिषद की वित्तीय एवं प्रशासकीय विलंब समिति के मा. सभापति डॉ. रतन पाल सिंह ने समिति के सदस्य श्री विजय बहादुर पाठक, एमएलसी डॉ. जयपाल सिंह व्यस्त और एमएलसी श्री गोपाल अंजान की उपस्थिति में मुरादाबाद शहर स्थित सर्किट हाउस के सभागार में जिलाधिकारी श्री अनुज सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री सतपाल अंतिल और मुख्य विकास अधिकारी सुश्री मृणाली अविनाश जोशी सहित जनपद के अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ बैठक की।

बैठक के दौरान उन्होंने पुलिस विभाग, अग्निशमन, नगर निगम, खाद्य सुरक्षा, मुरादाबाद विकास प्राधिकरण, विद्युत विभाग, जल निगम (नगरीय), लोक निर्माण विभाग आदि से संबंधित अधिकारियों से उनके कार्यालय से सेवानिवृत हो चुके कार्मिकों की पेंशन, ग्रेच्युटी सहित अन्य विभिन्न देयकों की वर्तमान स्थिति के बारे में विस्तार पूर्वक समीक्षा की।
खाद्य सुरक्षा विभाग के कार्यों की समीक्षा के दौरान मा. सभापति ने सहायक आयुक्त (खाद्य) से वर्ष 2017 से अब तक लिए गए नमूनों के सापेक्ष निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए की गई कार्यवाई के बारे में जानकारी प्राप्त की साथ ही दीपावली के दौरान खाद्य पदार्थों में हानिकारक मिलावट को रोकने के लिए विभाग स्तर से किए गए प्रयासों और कार्रवाई के बारे में भी समीक्षा की।
सहायक आयुक्त (खाद्य) ने बताया कि 01 अप्रैल 2025 से अब तक 586 नमूने लिए गए हैं, सभापति ने जिलाधिकारी से कहा कि वे टीम बनाकर 2017 से अब तक खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जिले में लिए गए नमूनों के आधार पर लंबित प्रकरणों का समाधान कराएं साथ ही कार्रवाई में विलंब होने के संबंध में अधिकारियों की भूमिका की भी कमेटी के माध्यम से जांच कराई जाए।
विद्युत विभाग में लंबित मामलों की समीक्षा के दौरान सभापति ने अधीक्षण अभियंता से बिजनेस प्लान 2025-26 के बारे में जानकारी प्राप्त की तथा कहा कि बिजनेस प्लान तैयार करने के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों का सहयोग भी अनिवार्य रूप से लिया जाए तभी आमजन की समस्याओं का समाधान और स्थानीय जरूर के अनुरूप बेहतर प्लान तैयार होगा। सभापति ने कहा कि कार्यालय स्तर पर सेवानिवृत कर्मचारियों के देयकों के भुगतान में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए साथ ही मृतक आश्रित के प्रकरणों में भी विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए यथाशीघ्र समाधान होना चाहिए





























