सिरसी में जुलूसे मोहम्मदी में उमड़ा आस्था का सैलाब
बड़ी संख्या में लोगों ने की शिरकत, सीरत-ए-रसूल ﷺ की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने का दिया संदेश


मोहम्मद यूसुफ(जनता और जनादेश)
सिरसी। दारुल उलूम इस्लामिया इस्लाहुलकौम, सिरसी के तत्वावधान में जुलूसे मोहम्मदी का भव्य एवं गरिमापूर्ण आयोजन किया गया। जुलूस में बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद ﷺ के प्रति अपनी अकीदत और मोहब्बत का इज़हार किया। जुलूस के दौरान धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण बना रहा और प्रतिभागियों ने दरूद-ओ-सलाम का नज़राना पेश किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मदरसा इस्लाहुलकौम के मुदर्रिस कारी यज़दानी साहब ने तिलावत-ए-कुरआन-ए-करीम से किया। इसके बाद हज़रत उस्मान हारूनी साहब, उत्तराखंड ने नात-ए-पाक पेश की। कार्यक्रम की निज़ामत हज़रत अंसारुल क़ादरी साहब, पाकबड़ा, मुरादाबाद ने की।

इस अवसर पर हज़रत मौलाना शकील अहमद साहब, बुलंदशहर ने खिताब करते हुए कहा कि हज़रत मुहम्मद ﷺ की पूरी ज़िंदगी इंसानियत, रहमत, मोहब्बत, भाईचारे, सदाचार और अच्छे अखलाक का मुकम्मल नमूना है। उन्होंने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ ने लोगों को एक-दूसरे के अधिकारों का सम्मान करने, जरूरतमंदों की मदद करने, माता-पिता के साथ अच्छा व्यवहार करने तथा समाज में अमन और भाईचारा कायम करने की शिक्षा दी। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम सीरत-ए-पाक को केवल सुनने और पढ़ने तक सीमित न रखें, बल्कि उसे अपने जीवन और व्यवहार का हिस्सा बनाएं।

मौलाना शकील अहमद ने कहा कि कुरआन-ए-करीम में अल्लाह तआला ने नबी-ए-करीम ﷺ को रहमतुल्लिल-आलमीन के रूप में पेश किया है। इसलिए आपकी सीरत पूरी इंसानियत के लिए रहमत, मार्गदर्शन और बेहतर जीवन का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को अपने आचरण में सच्चाई, ईमानदारी, सहनशीलता, प्रेम और इंसानियत को अपनाना चाहिए।
हज़रत हाजी गुलाम रब्बानी साहब, चंदौसी, संभल ने कहा कि नबी-ए-करीम ﷺ से सच्ची मोहब्बत का तकाज़ा यह है कि इंसान आपकी सुन्नत और शिक्षाओं को अपनी जिंदगी में उतारे। उन्होंने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ ने इंसानों के बीच भेदभाव मिटाकर आपसी भाईचारे और बराबरी का संदेश दिया। पड़ोसी के अधिकार, गरीबों और जरूरतमंदों की मदद तथा समाज के कमजोर वर्गों के साथ हमदर्दी आपकी शिक्षाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने लोगों से अपने जीवन में अच्छे अखलाक और आपसी प्रेम को बढ़ावा देने की अपील की।
इसके बाद जुलूस निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ा। रास्ते भर लोगों ने दरूद-ओ-सलाम का नज़राना पेश किया। जुलूस में बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों तथा विभिन्न वर्गों के लोगों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। प्रतिभागियों में नबी-ए-करीम ﷺ की सीरत और आपकी शिक्षाओं के प्रति गहरी अकीदत दिखाई दी। जुलूस के दौरान अनुशासन एवं व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया।
कार्यक्रम के समापन पर मुफ्ती आलम रज़ा ख़ान नूरी ने मुल्क में अमन-ओ-अमान, आपसी भाईचारे, देश की तरक्की, समाज की खुशहाली तथा कौम और पूरी इंसानियत के लिए विशेष दुआ की।
जुलूस की अध्यक्षता वसीम ख़ाँ, पूर्व चेयरमैन, नगर पंचायत सिरसी ने की। जुलूस कमेटी के उपाध्यक्ष हाजी अशफाक हुसैन अंसारी, फरमूद ख़ाँ, मास्टर चांद मोहम्मद ख़ाँ एवं हाजी मोहम्मद दीन अंसारी रहे। सचिव मास्टर महबूब आलम हैं।
इस अवसर पर सभासद इस्माइल हक कुरैशी, हाफिज रजा अली, हाफिज हबीब, इरफान सेफी, हाफिज गुलाम नबी, फरीद ख़ाँ, खुर्शीद ख़ाँ, इरशाद ख़ाँ, हनीफ अंसारी एवं नाजिर अली सहित अन्य लोगों की मौजूदगी रही।
लंगर व्यवस्था में हाजी मोहम्मद सादिक, रियाजुद्दीन सेफी एवं इरशाद कुरैशी ने अध्यक्ष के रूप में अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन किया। वहीं कोषाध्यक्ष मकबूल हुसैन अंसारी के साथ हाजी तासिम ख़ाँ, शाकिल कुरैशी, मेहदी ख़ाँ एवं सभासद इरफान ख़ाँ ने भी अपनी जिम्मेदारियां पूरी तत्परता एवं समर्पण के साथ निभाईं।
जुलूस में साउंड व्यवस्था की निगरानी हाजी मुशाहिद ख़ाँ, जाकिर हुसैन अंसारी, शमीम मलिक एवं यासीन ने की। मीडिया प्रभारी डॉ. शाकिर हुसैन इस्लाही रहे।
इस अवसर पर कारी अब्दुल शकूर, हाफ़िज़ अली हुसैन, मौलाना मोहम्मद नूरानी साहब, इमाम, जामा मस्जिद, सिरसी; हज़रत मौलाना मुफ़्ती शादाब साहब, इमाम, बुध बाज़ार, सिरसी; हज़रत मौलाना साक़िब रज़ा, इमाम, नूरानी मस्जिद, सिरसी; मौलाना मोहम्मद रफ़ी साहब, इमाम, क़ुरैशियान मस्जिद, सिरसी; मौलाना कामिल रज़ा साहब, इमाम, मेराज मस्जिद, सिरसी तथा हाफ़िज़ मोहम्मद अरमान साहब, इमाम, मस्जिद नासिर शहीद, सिरसी डॉ शाहिद हुसैन सैफी पूर्व सभासद, नजाकत हुसैन आदि का भी विशेष सहयोग रहा।
आयोजकों ने जुलूसे मोहम्मदी में शामिल होने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। शांतिपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण में संपन्न हुए इस जुलूस ने लोगों को सीरत-ए-रसूल ﷺ की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने तथा समाज में प्रेम, सद्भाव, भाईचारे और इंसानियत को मजबूत करने का संदेश दिया l



















