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उत्तरप्रदेशमुरादाबाद

कभी मुझे गिरता हुए देखकर मुझे संभालना,कभी अपने कांधो पर बैठाकर मुझे स्कूल छोड़कर आना,

कभी मेरे बीमार होने पर मेरे दर्द को खुद महसूस करना

Janta Aur Janadesh

Editorial by Dr fasi ur Rehamn Beig

कभी मुझे गिरता हुए देखकर मुझे संभालना,कभी अपने कांधो पर बैठाकर मुझे स्कूल छोड़कर आना,कभी मेरे बीमार होने पर मेरे दर्द को खुद महसूस करना,गरीबी में अपना पेट काटकर,परिवार के खर्चो को कम करके मुझे अच्छी तालीम के लिए भोजपुर से मुरादाबाद भेजना,गरीबी,मुफलिसी के हालत में भी मेरे स्कूल की फीस भरकर मुझे इस बात का अहसास नही होने देने की कोशिश करना कि वो आर्थिक रूप से परेशान है,यह देखकर कहीं मेरा हौसला न टूट जाये,जब कभी में किसी परेशानी में फंस जाता था अब्बू जान आपकी आंखे नम हो जाती थी,जब कभी में गम्भीर बीमार पड़ता था अपने आराम की रातों को मेरे साथ गुज़ारकर मुझे हौंसला देना,पूरी ज़िन्दगी परिवार के लालन पोषण के लिए कभी कश्मीर,कभी पाकिस्तान,कभी इस शहर कभी उस शहर में काम के लिए निकलना यकीकन पापा आपने मुझे एक अच्छा इंसान बनाने में जो किरदार अदा किया उसे में ज़िन्दगी भर तक नही भुला सकता,आपकी कुर्बानियों को में कभी नही भुला सकता,मुझे याद है कि जब किसी परेशानी में मेरा हौसला टूटता था तो आप मुझे साये की तरह मेरे साथ खड़े होकर मुझे एक ऐसा हौसला देते थे जो मेरी परेशानी को आधा कर देता था। 10 अप्रेल सन 2021 को आप हमें छोड़कर इस दुनिया से अलविदा कह गये लेकिन आज भी मुझे ऐसा लगता है कि आप साये की तरह मेरे साथ है,आपके नूरानी चेहरे और लोगो के प्रति खुशमिज़ाजी के रवैये की आज लोग जब आपकी प्रशंसा करते हैं तो मेरा सिर आज भी फक्र से उठ जाता है। पापा,ओर मेरे पापा,आप बहुत जल्दी इस दुनिया को छोड़कर आप आखिरकार क्यों चले गये अभी तक तो आपने हमारा केरियर बनाने के लिए संघर्ष किया था और जब हमारी तरक्की,खुशहाली के दिन आये तो आप हमसे जुदा हो गये,हमारे दिल में भी बहुत से अरमान थे,हम भी आपके अहसानात को दिल में रखे रह गये,पापा आपने अपनी ज़िन्दगी को खुददारी से गुज़ारा,अपने तालीमी,और सामाजिक कार्यो की वजह से देश के राष्टृपति ने भी आपका लोहा मानकार आपको देश के सबसे बड़े सम्मान राष्टृपति एवार्ड से नवाज़ा,यकीकन मुझे आप पर फर्क है कि मेूं आपका बेटा हूं,आपने जो संस्कार मुझे दिये उन्ही को आगे बढ़ाने की कोशिश में कर रहा हूं और इंशा अल्लाह आपके सहयोग से जो भी तालीमी ईदारे आपने कायम किये इंशाअल्लाह में उन्हे देश के ऐसे तालीमे ईदारे बनाने की कोशिश में लगा हूं जिसमें तालीम हासिल करने वाले देश के नौजवान पूरी दुनिया में अपना नाम रोशन कर इस देश की तरक्की में भागीदार बनें। देशभक्ति आपके किरदार में कूट,कूट कर भरी हुई थी,कभी आपने हालातो से समझौता नही किया बलकि हालात बदलने की पूरी कोशिश भी की।यकीकन इस बात को सोचकर मेरी आंखे नम ही नही होती बलकि मेरी आंखे आंसुओं से छलक पड़ती है और यह सोचकर में ज़ार ज़ार रोने भी लगता हूं कि क्या अब्बू जान सारी दुआ आप मुझे ही दे गये,क्या सारी कामयाबी की दुआओं से आप मुझे ही नवाज़ गये,मेरी आंखे नम है और मुझे ऐसा महसूस हो रहा है कि इस कुर्बानी के इस पर्व पर आप मेरे साथ साया बनकर ईद मनायेंगे। पापा एक बार फिर दिल से आंखे नम करके बोल रहा हूं यकीकन आप हमें जल्द छोड़कर चले गये लेकिन खुशी इस बात की है कि आप मरे नही बलकि आपने दुनिया से परदा किया है और आज आप आसमान से मुझे देखकर,मेरा हौसला अफज़ाई कर रहे है। मैने यह देखा है कि एक,मां,बाप अपनी औलाद के लिए अपनी पूरी ज़िन्दगी मेहनत करके उनका पालन पोषण करते है लेकिन 11 औलादो को एक मां,बाप को पालना भारी पड़ जाता है। आपने हमें कभी एहसास ही नही होने दिया कि आटा,दाल का क्या भाव है,आज वो दिन आये थे कि आपने अपना पेट काटकर अपने खर्चो को नज़र अंदाज करके हमें एक कामयाब इंसान बनाया उन खुशियो का मज़ा लेने से पहले आप इस दुनिया से फानी हो गये,पापा आप बहुत जल्दी चले गये,जल्दी चले गये। आपके खिदमतो को दिल से सलाम।

TAKING PRESIDENT AWARD WITH HIS FATHER MOULVI HABIB UR REHMAN QABLI ,BY VICE PRESIDENT OF INDIA HONOURABLE VAKAYYEA NAIDU


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