पत्रकार फैजान कुरेशी के साथ मुगलपुरा पुलिस द्वारा अमानवीय दरिंदगी की हरकतों एवम पुलिसिया उत्पीड़न की जांच अब मानवाधिकार आयोग करेगा,आयोग ने पत्रकार की शिकायत पर लिया गंभीर संज्ञान l शिकायत दर्ज कर दिए जांच के आदेश l
पीड़ित पत्रकार फैजान कुरेशी ने कहा,कलम जीतेगा,हारेगा झूट,उन्हे मानवाधिकार आयोग से न्याय की पूरी उम्मीद l

मुरादाबाद: दैनिक समाचार पत्र के मंडल प्रभारी फैजान कुरैशी को जेल भेजने और पुलिस हिरासत में मारपीट करने,मोबाइल और रुपए छिनने,अपमानित करने व उसको जूते में पेशाब पिलाना का प्रयास करने का मामला राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग तक पहुंच गया है इसके अलावा इस पूरे प्रकरण की जानकारी प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को भी दे दी गई है और कार्यवाही की मांग की गई है। 12/13 जून को पत्रकार फैजान कुरैशी ने मुगलपुरा क्षेत्र में खुले आम हो रहे सट्टे का एक वीडियो वायरल कर दावा किया था कि वह इस प्रकरण की पूरी रिपोर्ट छापेंगे जिसमे थाना मुगलपुरा के मुखबिरों और कुछ पुलिस कर्मियों के सट्टा माफिया से रिश्तों का भी खुलासा होने वाला था इस वीडियो को देखने के बाद मुगलपुरा पुलिस ने पत्रकार को फांसने का पूरा षड्यंत्र रच डाला और दिन निकलते ही थाना गलशहीद में तैनात दो उपनिरीक्षकों की मदद से थाना गलशहीद बुलाकर पत्रकार को जबरन पिस्टल की नोक पर उपनिरीक्षक जगजीत सिंह और परविंदर मलिक मोटर साइकिल पर बैठकर जबरन ले गए और थाने ले जाकर बुरी तरह मारा पीटा और अमानवीय व्यवहार किया। पत्रकार की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह सच को सरकार और जनता के सामने लाए समाज के लिए नासूर बन चुके जुए, सट्टा,मादक पदार्थों के अवैध धंधों एवं अपराधियों और माफियाओं को संरक्षण देने वालों को बेनकाब करे शायद मुगलपुरा पुलिस को यह सब गवारा नहीं था इसीलिए उसने पत्रकार को फांसने का षड्यंत्र रचा और अमानवीय व्यवहार की हदें पार की और एक पत्रकार को बलवे और दंगे जैसे गंभीर मुकदमे में जेल भेज दिया ज्ञात रहे कि 10 जून को थाना मुगलपुरा पुलिस की तरफ से दंगे और बलवे का एक मुकदमा पंजीकृत हुआ था और उसने उसी मकदमे में ही फैजान कुरैशी जेल भेज दिया जबकि फैजान कुरैशी का दावा है कि उनका इस प्रकरण से कोई लेना देना नही वह वहां थे ही नहीं।





















