पंडित मदन मोहन व्यास स्मृति सम्मान से रामावतार रस्तोगी सम्मानित
पुण्यतिथि पर साहित्यिक मुरादाबाद की ओर से किया गया भव्य समारोह, काव्य कृति श्री हरि वंदना का हुआ लोकार्पण

फसी उर रहमान बेग (संपादक)। मुरादाबाद। मुरादाबाद मंडल के साहित्य के प्रसार एवं संरक्षण को पूर्ण रूप से समर्पित संस्था साहित्यिक मुरादाबाद की ओर से प्रख्यात साहित्यकार एवं संगीतज्ञ पंडित मदन मोहन व्यास की पुण्यतिथि पर सम्मान समारोह एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

जिसमें भक्ति साहित्य एवं संगीत के क्षेत्र में योगदान के लिए वयोवृद्ध साहित्यकार एवं संगीतज्ञ राम अवतार रस्तोगी शरणागत को अंगवस्त्र, मानपत्र, श्रीफल भेंट कर पंडित मदन मोहन व्यास स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया तथा उनकी काव्य कृति श्री हरि वंदना का लोकार्पण किया गया।
लाजपत नगर स्थित श्री रामलीला मैदान के सभागार में आयोजित समारोह का शुभारंभ संयोजक मनोज व्यास और राजीव व्यास द्वारा पंडित मदन मोहन व्यास रचित मां सरस्वती वंदना की प्रस्तुति से हुआ। साहित्यिक मुरादाबाद के संस्थापक डॉ मनोज रस्तोगी ने स्मृतिशेष पंडित मदन मोहन व्यास का जीवन परिचय प्रस्तुत करते हुए कहा कि महानगर के मुहल्ला जीलाल में 5 दिसंबर 1919 को जन्में आडंबर, छल–कपट से कोसों दूर सादगी, सरलता,सहजता की प्रतिमूर्ति, निश्छल और पारदर्शी व्यक्तित्व के धनी पंडित मदन मोहन व्यास साहित्य, संगीत और अभिनय की त्रिवेणी थे। उनकी दो कृतियों भाव तेरे शब्द मेरे तथा हमारा घर प्रकाशित हो चुकी हैं।उनका देहावसान 23 मई 1983 को हुआ।
मुकुल व्यास ने सम्मानित विभूति रामावतार रस्तोगी शरणागत का जीवन परिचय प्रस्तुत करते हुए कहा कि तीन मार्च 1928 को जन्में श्री राम अवतार रस्तोगी ‘शरणागत’ एक ऐसी विभूति हैं जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन आध्यात्म, भक्ति और संगीत को समर्पित कर दिया।
इस अवसर पर साहित्यकारों द्वारा पंडित मदन मोहन व्यास के गीतों की प्रस्तुति भी की गई। राजीव प्रखर ने उनका गीत ..भाव तेरे शब्द मेरे गीत बनते जा रहे हैं , डॉ प्रेमवती उपाध्याय ने खिले रसभरे नीरजों को निरख कर, मधुप झूम झुक उठ रहे, मिल रहे हैं, मयंक शर्मा ने जागरण का गीत गाते साथियों , बढ़ते चलो अब और कार्तिकेय व्यास ने हिंदुस्तान जिंदाबाद गीत प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बाल सुंदरी व्यास ने कहा पंडित मदन मोहन व्यास ने अपने ताऊ पंडित बुलाकी व्यास और पिता पंडित पुरुषोत्तम व्यास की संगीत परम्परा को आगे बढ़ाया। वह हारमोनियम, तबला, सितार, मृदंग आदि वाद्य यंत्रों में दक्ष थे।
मुख्य अतिथि डॉ नितिन बत्रा ने उनसे संबंधित संस्मरण प्रस्तुत करते हुए कहा वह एक कुशल शिक्षक और छात्रों के प्रेरणा स्त्रोत थे। किए।
चर्चित दोहाकार योगेंद्र वर्मा व्योम ने कहा कि कीर्तिशेष मदन मोहन व्यास जी के गीतों में पारंपरिक प्रतीकों की सुरभि से सुवासित प्रेम, प्रकृति, विरह आदि के भाव प्रचुर मात्रा में देखे जा सकते हैं। यह कविता का स्वर्णिम छायावादी कालखण्ड था जब व्यास जी अपने रचनाकर्म से हिन्दी गीत को समृद्ध कर रहे थे।
विज्ञान कथा लेखक राजीव सक्सेना ने कहा
मदन मोहन व्यास जी की एक उत्कृष्ट बालकवि के तौर पर पहचान राष्ट्रीय स्तर पर थी। वरिष्ठ साहित्यकार हरि प्रकाश शर्मा ने कहा कि उनकी साहित्यिक ख्याति दूर दूर तक थी । प्रख्यात कवि डॉ हरिवंश राय बच्चन ने उनकी काव्य कृति की भूमिका लिखी थी।
श्रीकृष्ण शुक्ल ने कहा पारकर इंटर कालेज में हिन्दी के अध्यापक होने के साथ साथ वह साहित्यकार और संगीतज्ञ भी थे। डॉ प्रदीप शर्मा ने कहा कि उन्होंने जीवन पर्यंत लोगों के सुख-दुख में पूरा साथ दिया ।
डॉ पुनीत कुमार, धनसिंह धनेंद्र, रामदत्त द्विवेदी, उमाकांत गुप्ता, सीमा शर्मा, समीर तिवारी ने भी विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर डॉ राकेश चक्र, दुष्यंत बाबा, श्याम रस्तोगी,अशोक विद्रोही, मनोज मनु, शुभम कश्यप, हरि मोहन रस्तोगी, रश्मि विमल, उमेश त्रिवेदी पप्पन, विनोद सक्सेना, देवेश सिंह, बृजेश सिंह, रविंद्र गुप्ता, नरेश सारस्वत, अभय शर्मा, पूर्णेन्दु शर्मा, सुमन रोहिल्ला, शिखा रस्तोगी, रमेश आर्य, धवल दीक्षित, विष्णु अवतार , शशि मोहन, अभिनव, गणेश, राजरानी, ब्रह्मा अवतार ,सारिका , नितिन व्यास आदि उपस्थित रहे।
टीम जनता और जनादेश





























