इमाम हज़रत ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम की शबे शहादत पर एक मजलिस का आयोजन


सिरसी सादात :मोहम्मद यूसुफ
गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी अंजुमने मुहाफ़िज़े अज़ा के तत्वावधान में शिया समुदाय के चौथे इमाम हज़रत ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम की शबे शहादत पर एक मजलिस का आयोजन किया गया। जिसमें चौधरी बबर अली व उनके साथियों ने सोज़ख़्वानी की तथा ज़ाकिरे अहलेबैत क़ाज़ी सैय्यद हुसैन रज़ा साहब क़िब्ला ने मजलिस को खिताब फ़रमाते हुए कहा।कि हमें अपने चौथे इमाम से मुहब्बत का सुबूत इस तरह देना चाहिए। कि हम ख़ुद उनके बताए हुए रास्ते पर चलें और दूसरों को भी उनके किरदार के बारे में बतायें। मुहब्बत सुबूत चाहती है। लेकिन आज उनकी मुहब्बत का दावा करने वाले मस्जिदों से दूर हैं। हमारे इमाम का पैग़ाम है कि ख़ुदा के बन्दों को कभी भी ख़ुदा की इबादत से ग़ाफ़िल नहीं होना चाहिये। ख़ुशी हो या ग़म अज़ादारों को चाहिये।कि अपने इमाम की सीरत पर अमल करें।अंत में मौलाना ने कर्बला के शहीदों के मसायब बयान किए। मजलिस के बाद ज़ु्ल्जनाह व ताबूत का जुलूस निकाला गया।

जिसमें बाहर से आई अंजुमन अंजुमने शब्बीरिया लखनऊ , अंजुमने अज़ादारे हुसैनी बनारस , अंजुमने सिपाहे हुसैनी भनौली सादात सुल्तानपुर तथा अब्बास अली आरफ़ी के अलावा मुक़ामी अंजुमन, अंजुमने मुहाफ़िज़े अज़ा, अंजुमने रौनक़े अज़ा, अंजुमने बहारे अज़ा, अंजुमने शमीमे ईमान, अंजुमने ग़ुन्चये इस्लाम, अंजुमने गौहरे अज़ा, अंजुमने फ़ैज़े पंजेतन आदि ने भी नौहेख़्वानी व सीना ज़नी की। जुलूस अपने निर्धारित रास्ते से होता हुआ बड़ा इमाम बारगाह पहुंच कर सम्पन्न हुआ।जूलस का संचालन कमाल अख़्तर ने किया।इस मौक़े पर सामिन सिरसिवी, चौधरी नबी रज़ा, आफ़ताब अहमद दालानी,चौधरी सलमान रज़ा, मौहम्मद काज़िम,अली काज़िम,मौअज़्ज़म,अज़हान, मुदस्सिर आदि मौजूद रहे।




















