दि बार एसोसिएशन एण्ड लाइब्रेरी मुरादाबाद के सभागार में हिंदी पखवाड़ा कार्यक्रम के अंतर्गत राजभाषा हिंदी पर विचार गोष्ठी का आयोजन
कार्यक्रम का शुभारंभ ज्ञान एवं विद्या की देवी मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं के साथ हुआ

26 सितंबर (फसी उर रहमान बेग)। दि बार एसोसिएशन एण्ड लाइब्रेरी मुरादाबाद के सभागार में हिंदी पखवाड़ा कार्यक्रम के अंतर्गत राजभाषा हिंदी पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया| कार्यक्रम की अध्यक्षता दि बार एसोसिएशन एण्ड लाइब्रेरी के अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता एडवोकेट ने की | कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ पत्रकार एवं तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ माधव शर्मा रहे एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में हिंदू डिग्री कॉलेज की शिक्षा विभाग की प्रोफेसर डॉक्टर इला अग्रवाल मौजूद रही | कार्यक्रम का संचालन दि बार एसोसिएशन एण्ड लाइब्रेरी मुरादाबाद के महासचिव कपिल गुप्ता एडवोकेट ने किया| कार्यक्रम का शुभारंभ ज्ञान एवं विद्या की देवी मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं के साथ हुआ |

इस अवसर पर अधिवक्ताओं के द्वारा हिंदी के उत्थान एवं हिंदी को राजभाषा से राष्ट्रभाषा बनाने पर अपने विचारों की अभिव्यक्ति की गई| साहित्य से जुड़े अधिवक्ताओं के द्वारा कविता,मुक्तक,गजल और शेर पढ़े गए | कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप बोलते हुए डॉक्टर इला अग्रवाल ने कहा कि यदि हमें वास्तव में हिंदी को उत्थान करना है तो किसी एक दिन की जगह प्रत्येक दिन हिंदी को समर्पित होना पड़ेगा और साथ ही साथ हिंदी की जो सहायक भाषा हैं अवधि,ब्रज, खड़ी बोली और अन्य बोलियां को भी हिंदी के साथ में लेते हुए आगे चलना पड़ेगा | कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए डॉक्टर माधव शर्मा ने कहा कि यह एक बहुत बड़ा समय है जब हमें हिंदी को समृद्ध बनाने के लिए प्रयास करने हैं और प्रयास करने के लिए आवश्यकता है कि उसे हम अपनी युवा पीढ़ी को जोड़ें आज की युवा पीढ़ी जो की जन्म से ही मोबाइल से जुड़ रही है जो हिंदी तो छोड़िए ना तो वह हिंदी सही से लिख व पढ़ पा रही है ना वह अंग्रेजी सही से लिख पा रही है ना ही उर्दू सही से लिख पा रही है और ना ही समझ पा रही है ऐसे में किसी भी भाषा को समृद्धि कर पाना बड़ा ही दुष्कर होगा उसके लिए हमें यह प्रयास करना होगा कि हमारे युवा हमारी भाषा के महत्व को समझें भाषा की व्याकरण को समझें भाषा के तथ्य को समझें और भाषा की मिठास को समझें जब वह इससे जुड़ जाएंगे तो स्वतः ही हिंदी का विकास होगा और बात रही सरकारी स्तर पर हिंदी के विकास की तो यह विकास जो विगत 75 वर्षों से लगातार प्रयासरत है अगर हमें इस धरातल पर लाना है तो इसके लिए प्रयास करना होगा हिंदी भाषी क्षेत्र के साथ-साथ देश के अन्य कोनो में भी हिंदी को पहुंचाने का कार्य करना होगा | हिन्दी को हमें संस्कार के साथ व्यापार की भाषा बनना होगा | कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे दि बार एसोसिएशन एण्ड लाइब्रेरी मुरादाबाद के अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाने बहुत ही आवश्यक है जिसमें हमें अपने अधिवक्ता समाज के साथ-साथ अन्य विद्वानों को भी सुनने का अवसर मिलता है | हिंदी के लिए न्यायालय में सबसे बड़ी बात यह है न्यायालय में जो वादकारी आते हैं हिंदी भाषा क्षेत्र में खासकर उन्हें उस भाषा का ज्ञान ही नहीं होता जिसमें उनका मुकदमा चल रहा होता है तो वहां पर भाषा का हिंदी करण करने के साथ ही साथ हमें कुछ जगह पर संवैधानिक रूप से भी हिंदी के लिए काम करना होगा संवैधानिक संस्थाओं को भी इसके लिए जागरूक करना होगा | इस अवसर पर कार्यक्रम में हिंदी साहित्य के लिए कार्य करने वाले अधिवक्ताओं को भी सम्मानित किया गया | इस अवसर पर कार्यक्रम में बार के पूर्व अध्यक्ष अशोक सक्सेना, आदेश श्रीवास्तव पूर्व महासचिव राकेश वशिष्ठ, राकेश जौहरी, अभिषेक भटनागर, अंजार हुसैन जितेंद्र प्रताप सिंह जेपी, रामा पंत पांडे, मोहम्मद तंजीम शास्त्री, शहवेज इकबाल, संजीव राघव ,सुनील बिश्नोई ,विवेक कुमार निर्मल पुष्प यादव, आवरण अग्रवाल श्रेष्ठ, अरविंद कुमार शर्मा ” आनंद”, अजय पाल, रघुवीर सिंह, लुबना ग़जाला, कमाल अख्तर, रूही खान, इरम खान विशाल भारद्वाज आदि अधिवक्ता गण मौजूद रहें|





























