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सनातन धर्म में सर्वोपरि है प्रभु के प्रसाद,स्वामी नारदानंद ऋषि आश्रम में 118वें साप्ताहिक भंडारे का भव्य आयोजन संपन्न का महत्व और सम्मान: बाबा संजीव आकांक्षी

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(फसी उर रहमान बेग,Editor,मुरादाबाद। सेवा और अध्यात्म के प्रमुख केंद्र, लाल बाग स्थित स्वामी नारदानंद ऋषि आश्रम में मंगलवार को निरंतर चल रही सेवा श्रृंखला के अंतर्गत 118वें विशाल भंडारे एवं ‘मंगल चिंतन’ का आयोजन पूरी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। आश्रम द्वारा बिना किसी व्यवधान के लगातार 118 हफ़्तों से चलाई जा रही इस रसोई में इस बार भी सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त की।

इस पावन अवसर पर आयोजित ‘मंगल चिंतन’ सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता बाबा संजीव आकांक्षी ने सनातन संस्कृति में प्रसाद की महिमा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि सनातन धर्म और संस्कृति में यदि किसी चीज को सर्वोपरि और सबसे अधिक सम्मानजनक माना गया है, तो वह प्रभु का प्रसाद है। प्रसाद केवल भूख मिटाने का साधन या कोई साधारण खाद्य पदार्थ नहीं है, बल्कि यह ईश्वर की कृपा और साक्षात आशीर्वाद का स्वरूप होता है। जब भोजन को भगवान को अर्पित कर दिया जाता है, तो उसका कण-कण पवित्र और दिव्य हो जाता है।

बाबा संजीव आकांक्षी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सनातन परंपरा में प्रसाद को ग्रहण करने के भी नियम और संस्कार बताए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रसाद को हमेशा पूरे सम्मान, श्रद्धा और शांत चित्त से सिर झुकाकर स्वीकार करना चाहिए। प्रसाद का आदर करना वास्तव में परमात्मा का आदर करने के समान है। जो मनुष्य श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण करता है, उसके अंतःकरण की शुद्धि होती है और उसके विचार पवित्र होते हैं।

आश्रम के सेवादारों ने बताया कि स्वामी नारदानंद ऋषि आश्रम में ‘स्वामी नारदानंद रसोई’ के माध्यम से प्रत्येक मंगलवार को यह आयोजन बिना रुके निरंतर जारी है। आज 118वें भंडारे के सफल आयोजन पर आश्रम परिसर में विशेष उत्साह का माहौल देखा गया। सुबह से ही सेवादार प्रभु इच्छा से प्रसाद तैयार करने और व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने में जुटे रहे। दोपहर को महाआरती के बाद भंडारे का शुभारंभ हुआ, जो देर शाम तक अविरल चलता रहा।

इस अवसर पर आश्रम के मार्गदर्शक मुन्ना गुरु जी, बाबा संजीव आकांक्षी, आर्शिका पांडेय, वर्तिका शर्मा, माधव शर्मा, पंकज शर्मा, सुरेंद्र सिंह, अशोक गुप्ता, प्रमोद रस्तोगी, डॉ. बृजपाल सिंह यादव, पुरुषोत्तम शर्मा सहित तमाम भक्तों ने तन-मन-धन से अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।


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