ग्रामीण छात्राओं के भविष्य पर मंडराया संकट: विश्वविद्यालय में प्रवेश तिथि समाप्त, तिथि विस्तार की मांग तेज़,प्रवेश की तिथि न बड़ी तो डिग्री से वंचित रह जायेंगे छात्र
इंटरनेट की सुविधा का अभाव और तकनीकी जटिलताएं भी बड़ी बाधाएं रहीं। प्रतिदिन दर्जनों छात्राएं महाविद्यालय पहुंच रही हैं, लेकिन पंजीकरण तिथि समाप्त होने के कारण उन्हें मायूस लौटना पड़ रहा है।”

मुरादाबाद, 22 जुलाई 2025(जनता और

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गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद द्वारा सत्र 2025–26 के लिए स्नातक प्रथम वर्ष में प्रवेश हेतु ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया की अंतिम तिथि समाप्त हो चुकी है, जिससे ग्रामीण अंचलों की सैकड़ों छात्राएं उच्च शिक्षा से वंचित होने के कगार पर हैं।
स्थानीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। एक प्राचार्य द्वारा कुलसचिव को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि “ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं को समय पर सूचना नहीं मिल सकी, इंटरनेट की सुविधा का अभाव और तकनीकी जटिलताएं भी बड़ी बाधाएं रहीं। प्रतिदिन दर्जनों छात्राएं महाविद्यालय पहुंच रही हैं, लेकिन पंजीकरण तिथि समाप्त होने के कारण उन्हें मायूस लौटना पड़ रहा है।
उन्होंने आगे लिखा कि विश्वविद्यालय द्वारा यदि 7 से 10 दिन की तिथि वृद्धि कर दी जाती है, तो सैकड़ों छात्राओं का भविष्य सुरक्षित हो सकता है।
*📌 स्थानीय जागरूकता की कमी बनी बाधा*
ग्रामीण अंचलों में जागरूकता का अभाव, ऑनलाइन प्रक्रिया की कठिनता, और इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसी समस्याओं ने विशेष रूप से बालिकाओं को प्रभावित किया है। कई छात्राएं ऐसी भी हैं, जो पहली पीढ़ी की शिक्षार्थी हैं और उच्च शिक्षा का सपना संजोए हुए हैं।
*📢 छात्रों व अभिभावकों में नाराजगी*
तिथि विस्तार की मांग को लेकर छात्रों और अभिभावकों में रोष है। कई सामाजिक संगठनों ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन से अपील की है कि छात्रहित और नारी शिक्षा को बढ़ावा देने के दृष्टिकोण से तिथि को तत्काल प्रभाव से पुनः खोला जाए।
*🎓 क्या कहता है शिक्षा क्षेत्र?*
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि “यह विश्वविद्यालय प्रशासन की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह हर विद्यार्थी को समान अवसर प्रदान करे। तकनीकी या सूचना के अभाव में यदि कोई वंचित रह रहा है, तो उसके लिए विशेष छूट या दूसरी अवसर की व्यवस्था होना चाहिए।”
*🔍 अब सबकी निगाहें विश्वविद्यालय पर*
अब यह देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस जनभावना को कितनी संवेदनशीलता से लेता है और छात्रहित में क्या निर्णय लेता है। यदि पंजीकरण तिथि को पुनः न खोला गया, तो यह मुद्दा जल्द ही बड़े स्तर पर आंदोलन का रूप भी ले सकता है।
*रिपोर्टर: राहत अली*
*संपर्क: 9808019396*





























