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उत्तरप्रदेशसम्भल (भीम नगर)

बिजली विभाग के निजीकरण के विरोध में संभल प्रान्त व्यापी प्रदर्शन जारी

सरकार की नीति कर्मचारी संगठन नहीं बनाएंगे तो सरकार की नीति कथित डिस्कॉम एसोशिएशन भी नहीं बनाएंगे: घंटों तक चलने वाली वी सी से प्रभावित होती है बिजली व्यवस्था

Janta Aur Janadesh

मोहम्मद यूसुफ, क्राइम हेड(संभल)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, संभल ने पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन के बयान पर पलटवार करते हुए कहा है कि यदि कर्मचारी संगठन सरकार की नीति नहीं तय करेंगे तो कथित डिस्कॉम एसोशिएशन भी सरकार की नीति नहीं तय करेंगे। संघर्ष समिति ने आज कहा कि घंटों चलने वाली वी सी बिजली आपूर्ति के लिए साधक नहीं अपितु बाधक होती है। आज लगातार 188 वें दिन बिजली कर्मियों ने निजीकरण के विरोध में प्रांत भर में विरोध प्रदर्शन जारी रखा।

संभल में सरकार के खिलाफ,विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारी

संघर्ष समिति सदस्यों आशीष कटारिया अभिमन्यु कुमार अर्जुन मौर्या अभिमन्यु कुमार रोहित कुमार अग्रसेन यादव प्रशांत श्रीवास्तव अली सज्जाद ने पावर कारपोरेशन के चेयरमैन के इस वक्तव्य कि सरकार की नीति कर्मचारी संगठन तय नहीं करेंगे पर पलटवार करते हुए कहा है कि सरकार की नीति कथित आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन भी नहीं तय करेगी जिसके स्वयंभू जनरल सेक्रेटरी डॉ आशीष गोयल हैं। संघर्ष समिति ने बताया कि नवंबर 2024 के दूसरे सप्ताह में लखनऊ में विद्युत वितरण निगमों की एक मीटिंग पांच सितारा होटल में हुई । इसी बैठक में सुधार के नाम पर विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का निर्णय लिया गया। इस मीटिंग में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के नाम से एक संगठन गठित कर लिया गया । इस संगठन के जनरल सेक्रेटरी डॉक्टर आशीष गोयल बन गए और कोषाध्यक्ष दिल्ली की निजी कंपनी बी एस ई एस यमुना(रिलायंस पावर) के सी ई ओ अमरदीप सिंह बने। इस नव गठित डिस्कॉम एसोशिएशन में उड़ीसा के टाटा पॉवर के गजानन काले और नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड के पी आर कुमार भी है। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव आगे बढ़ाने का अंदरुनी निर्णय इसी डिस्कॉम एसोशिएशन की बैठक में कार्पोरेट के साथ मिलकर लिया गया जिसके जनरल सेक्रेटरी स्वयं डॉक्टर आशीष गोयल हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि पता चला है कि यह एसोशिएशन मोटा चंदा वसूल रही है और आशीष गोयल के साथ इसके कोषाध्यक्ष अमरदीप सिंह एक निजी कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि यह निजी कॉरपोरेट अपने निहित स्वार्थ में उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों का निजीकरण करने पर तुले हुए हैं।

संघर्ष समिति ने आगे कहा कि सही है कि कर्मचारी संगठन सरकार की नीति नहीं तय करेंगे किंतु कर्मचारी संगठनों से नीतिगत मामलों पर विचार विमर्श किया जाता रहा है। 05 अप्रैल 2018 और 06 अक्टूबर 2020 को ऊर्जा मंत्री और वित्त मंत्री के साथ हुए लिखित समझौते में कहा गया है कि विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति को विश्वास में लिए बिना प्रदेश में ऊर्जा क्षेत्र में कहीं पर भी कोई निजीकरण नहीं किया जाएगा। पावर कारपोरेशन के चेयरमैन को यह बताना चाहिए कि इन दोनों समझौता का सरासर उल्लंघन करते हुए उन्होंने निजीकरण का एक तरफा फैसला डिस्कॉम एसोशिएशन के गठन के चन्द दिन बाद कैसे ऐलान कर दिया।

इसके अतिरिक्त वर्ष 2000 में उप्र सरकार ने ऊर्जा निगमों में जॉइंट मैनेजमेंट काउंसिल बनाने का निर्णय लिया गया था। जॉइंट मैनेजमेंट काउंसिल के सामने नीतिगत विषय रखे जाते थे और इस काउंसिल में सभी मान्यता प्राप्त और बड़े कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधित होते थे। पिछले 20 वर्षों से जॉइंट मैनेजमेंट काउंसिल की कोई बैठक नहीं हुई। जॉइंट मैनेजमेंट काउंसिल काम नहीं कर रही है। ऐसे में नीतिगत मामलों पर कर्मचारी संगठनों का पक्ष भी प्रबंधन और सरकार के सामने नहीं आ रहा है। इसकी जिम्मेदारी पावर कारपोरेशन के प्रबंधन की है।

संघर्ष समिति ने कहा कि अनावश्यक तौर पर लंबी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठकों के कारण बिजली आपूर्ति प्रभावित होती है क्योंकि अभियन्ता इसी में फंसे रहते हैं। अतः जरूरी नहीं कि ऐसी बैठकों में अभियंता अपना समय नष्ट करें। अभियंताओं का मुख्य कार्य उपभोक्ताओं को इस भीषण गर्मी में बिजली आपूर्ति बनाए रखना है और उनकी यही प्राथमिकता है।

टीम:जनता और जनादेश


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