सतयुग दर्शन संगीत कला केन्द्र को इन्डिया प्राउड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा “भारत का सर्वोत्तम संगीत विद्यालय” के रूप में सम्मानित किया गया
भारत का सर्वोत्तम संगीत विद्यालय” सतयुग दर्शन संगीत कला केन्द्र को इन्डिया प्राउड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा सम्मानित किया गया

शादाब कुरैशी(उप संपादक)
सतयुग दर्शन सन्गीत कला केन्द्र जो भारतीय संगीत शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रमुख नाम है, को हाल ही में दिल्ली स्थित मुक्तधारा आडिटोरियम में भारत का सर्वोत्तम संगीत विद्यालय के रूप में सम्मानित किया गया। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार इन्डिया प्राउड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा संगीत में उत्कृष्टता, गुणवत्ता और शिक्षा के प्रति समर्पण के लिए प्रदान किया गया। इस पुरस्कार के माध्यम से सतयुग दर्शन संगीत कला केन्द्र ने न केवल भारत में संगीत शिक्षा के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्टता को साबित किया है, बल्कि यह संगीत के प्रति प्रेम और समर्पण के प्रतीक के रूप में स्थापित हो गया है।

संगीत शिक्षा में उत्कृष्टता का प्रतीक सतयुग दर्शन सन्गीत कला केन्द्र का मानना है कि संगीत केवल एक कला नहीं, बल्कि यह जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है। यहां छात्रों को संगीत के विविध रूपों में प्रशिक्षण दिया जाता है। यहां पर भारतीय शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत, और समकालीन संगीत की सभी विधाओं यथा गायन वादन एवं नृत्य तीनों विधाओं में शिक्षा दी जाती है। इस पुरस्कार से यह प्रमाणित होता है कि संस्थान न केवल संगीत के शास्त्रीय रूपों को जीवित रखने का कार्य कर रहा है, बल्कि आधुनिक युग की आवश्यकता जैसे कि मानव को मानव बनने की दिशा में भी सक्रिय रूप से योगदान दे रहा है।

संस्थान की सफलता का प्रमुख कारण उसकी शिक्षण पद्धति है, जिसमें विद्यार्थियों की व्यक्तिगत जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण दिया जाता है। यहां प्रशिक्षित और अनुभवी शिक्षक छात्रों को संगीत की गहरी समझ और अभिव्यक्ति प्रदान करते हैं। इसके साथ ही संस्थान में विभिन्न प्रकार के संगीत वर्कशॉप, संगीत सम्मेलन, और लाइव परफॉर्मेंस के अतिरिक्त वार्षिक उत्सव, वार्षिक प्रतियोगिताएं, मासिक संगीत बैठक आदि भिन्न भिन्न प्रकार के अवसर विद्यार्थियों को दिए जाते हैं, ताकि छात्रों को मंच पर अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिले।अनुपमा तलवार चेय़रपर्सन सतयुग दर्शन संगीत कला केन्द्र ने इस पुरस्कार के बारे में कहा कि “यह सम्मान हमारे समर्पित शिक्षकों, छात्रों, और कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम है। संगीत शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ तकनीकी कौशल विकसित करना नहीं है, बल्कि इसे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बनाना है। हमारे संस्थान में छात्रों को सिर्फ संगीत के बारे में नहीं, बल्कि जीवन के हर पहलू को समझने और उसे बेहतर बनाने का मार्गदर्शन दिया जाता है। इस पुरस्कार ने हमें अपने दृष्टिकोण पर विश्वास दिलाया है और हम आगे भी इसी तरह की उत्कृष्टता की ओर निरंतर बढ़ते रहेंगे। सभी को इस सफलता का श्रेय देना चाहते हैं।”
प्राचार्य दीपेंद्र कान्त ने बताया कि संपूर्ण भारत में सतयुग दर्शन सन्गीत कला केन्द्र की 20 शाखाएं कार्यरत हैं और सभी शाखाएं प्रयाग सन्गीत समिति प्रयागराज से मान्यता प्राप्त हैं l संगीत विद्यालय की पाठ्यक्रम संरचना इस प्रकार की है कि वह छात्रों को मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनाती है। छात्रों को उनके गायन, वादन, और नृत्य कला में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए मार्गदर्शन दिया जाता है। संगीत कला केन्द्र का प्रमुख उद्देश्य केवल शास्त्रीय संगीत की शिक्षा देना ही नहीं, समाज के हर आयु वर्ग के लिए मंच प्रदान करना भी है।
यहां छात्रों को न केवल संगीत की विविध शैलियों के बारे में सिखाया जाता है, बल्कि उन्हें संगीत से जुड़ी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी समझाई जाती है। इस प्रक्रिया में संगीत के विभिन्न रूपों को एक नए दृष्टिकोण से देखा जाता है, जो उनके व्यक्तिगत और रचनात्मक विकास को बढ़ावा देता है यही कारण है कि आज सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र को राष्ट्र में नयी पहचान मिली है | इस अवसर पर मैनेजर एस एन गोगिया जी ने ख़ुशी व्यक्त की इस सम्मान के लिए हम तहे दिल से सभी का धन्यवाद करते हैं।प्रेस नोट
-सतयुग दर्शन संगीत कला केन्द्र को इन्डिया प्राउड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा “भारत का सर्वोत्तम संगीत विद्यालय” के रूप में सम्मानित किया गया।
-“भारत का सर्वोत्तम संगीत विद्यालय” सतयुग दर्शन संगीत कला केन्द्र को इन्डिया प्राउड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा सम्मानित किया गया।
सतयुग दर्शन सन्गीत कला केन्द्र जो भारतीय संगीत शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रमुख नाम है, को हाल ही में दिल्ली स्थित मुक्तधारा आडिटोरियम में भारत का सर्वोत्तम संगीत विद्यालय के रूप में सम्मानित किया गया। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार इन्डिया प्राउड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा संगीत में उत्कृष्टता, गुणवत्ता और शिक्षा के प्रति समर्पण के लिए प्रदान किया गया। इस पुरस्कार के माध्यम से सतयुग दर्शन संगीत कला केन्द्र ने न केवल भारत में संगीत शिक्षा के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्टता को साबित किया है, बल्कि यह संगीत के प्रति प्रेम और समर्पण के प्रतीक के रूप में स्थापित हो गया है।
संगीत शिक्षा में उत्कृष्टता का प्रतीक सतयुग दर्शन सन्गीत कला केन्द्र का मानना है कि संगीत केवल एक कला नहीं, बल्कि यह जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है। यहां छात्रों को संगीत के विविध रूपों में प्रशिक्षण दिया जाता है। यहां पर भारतीय शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत, और समकालीन संगीत की सभी विधाओं यथा गायन वादन एवं नृत्य तीनों विधाओं में शिक्षा दी जाती है। इस पुरस्कार से यह प्रमाणित होता है कि संस्थान न केवल संगीत के शास्त्रीय रूपों को जीवित रखने का कार्य कर रहा है, बल्कि आधुनिक युग की आवश्यकता जैसे कि मानव को मानव बनने की दिशा में भी सक्रिय रूप से योगदान दे रहा है।
संस्थान की सफलता का प्रमुख कारण उसकी शिक्षण पद्धति है, जिसमें विद्यार्थियों की व्यक्तिगत जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण दिया जाता है। यहां प्रशिक्षित और अनुभवी शिक्षक छात्रों को संगीत की गहरी समझ और अभिव्यक्ति प्रदान करते हैं। इसके साथ ही संस्थान में विभिन्न प्रकार के संगीत वर्कशॉप, संगीत सम्मेलन, और लाइव परफॉर्मेंस के अतिरिक्त वार्षिक उत्सव, वार्षिक प्रतियोगिताएं, मासिक संगीत बैठक आदि भिन्न भिन्न प्रकार के अवसर विद्यार्थियों को दिए जाते हैं, ताकि छात्रों को मंच पर अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिले।
श्रीमती अनुपमा तलवार चेय़रपर्सन सतयुग दर्शन संगीत कला केन्द्र ने इस पुरस्कार के बारे में कहा कि “यह सम्मान हमारे समर्पित शिक्षकों, छात्रों, और कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम है। संगीत शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ तकनीकी कौशल विकसित करना नहीं है, बल्कि इसे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बनाना है। हमारे संस्थान में छात्रों को सिर्फ संगीत के बारे में नहीं, बल्कि जीवन के हर पहलू को समझने और उसे बेहतर बनाने का मार्गदर्शन दिया जाता है। इस पुरस्कार ने हमें अपने दृष्टिकोण पर विश्वास दिलाया है और हम आगे भी इसी तरह की उत्कृष्टता की ओर निरंतर बढ़ते रहेंगे। सभी को इस सफलता का श्रेय देना चाहते हैं।”
प्राचार्य दीपेंद्र कान्त ने बताया कि संपूर्ण भारत में सतयुग दर्शन सन्गीत कला केन्द्र की 20 शाखाएं कार्यरत हैं और सभी शाखाएं प्रयाग सन्गीत समिति प्रयागराज से मान्यता प्राप्त हैं l संगीत विद्यालय की पाठ्यक्रम संरचना इस प्रकार की है कि वह छात्रों को मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनाती है। छात्रों को उनके गायन, वादन, और नृत्य कला में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए मार्गदर्शन दिया जाता है। संगीत कला केन्द्र का प्रमुख उद्देश्य केवल शास्त्रीय संगीत की शिक्षा देना ही नहीं, समाज के हर आयु वर्ग के लिए मंच प्रदान करना भी है।
यहां छात्रों को न केवल संगीत की विविध शैलियों के बारे में सिखाया जाता है, बल्कि उन्हें संगीत से जुड़ी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी समझाई जाती है। इस प्रक्रिया में संगीत के विभिन्न रूपों को एक नए दृष्टिकोण से देखा जाता है, जो उनके व्यक्तिगत और रचनात्मक विकास को बढ़ावा देता है यही कारण है कि आज सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र को राष्ट्र में नयी पहचान मिली है | इस अवसर पर मैनेजर एस एन गोगिया जी ने ख़ुशी व्यक्त की इस सम्मान के लिए हम तहे दिल से सभी का धन्यवाद करते हैं।





























