मुरादाबाद के महान सपूतो के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता: शालिनी
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे हैं. लेकिन कुछ ऐसे भी हैं, जिन्होंने सन 1942 की लड़ाई में अपना अहम योगदान दिया था.

पीयूष शर्मा/मुरादाबाद: यूपी के मुरादाबाद में वैसे तो बहुत से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे हैं. लेकिन कुछ ऐसे भी हैं, जिन्होंने सन 1942 की लड़ाई में अपना अहम योगदान दिया था. उन्हें अपने इस योगदान के साथ-साथ ही सजा और जुर्माना भी भुगतना पड़ा था. आज भी जिले के लोग इन क्रांतिकारियों को बड़े मान सम्मान के साथ याद करते हैं.i इतिहासकार डॉक्टर अजय अनुपम ने बताया कि सन 1942 के आंदोलन में गुलजारीमल धर्मशाला के पास क्वार्टर नंबर दो में रहने वाले श्री जगत लाल के पुत्र ओमप्रकाश गुप्ता साइमन कमीशन के बहिष्कार से लेकर सन 1942 के आंदोलन तक राजनीति में सक्रिय रहे. उन्हें भारत छोड़ो आंदोलन चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया और 6 महीने की कठोर कारावास व 20 बेतों की सजा उन्हें भोगनी पड़ी. इसी तरह ख्याली राम शास्त्री यह नाम मुरादाबाद की राजनीति में बहुत महत्वपूर्ण नाम रहा है. ये जलालपुर के रहने वाले थे. 20 साल की आयु में यह व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन में गिरफ्तार किए गए. 6 महीने की कैद के साथ 100 रुपए जुर्माना की सजा सुनाई गई. भारत छोड़ो आंदोलन में गिरफ्तार किए जाने पर उन्हें 1 साल की कठोर सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई.






























