शहीदों की याद में तरासिरसी सादात साल्हेआयोजित
मजलिस को ख़िताब मौलाना एहतेशाम अली ने किया सदारत डॉक्टर नसीम उज़ ज़फ़र साहब ने की और निज़मत के फ्राइज़ ज़मन सिरसिवी और शाहदाब हुसैन मुश्तरका तौर दिए इसके बाद तरही शब्बेदारी शुरू हुई ।।ई शब्बेदारी का इनेक़ाद


गुज़िश्ता की तरह इम्साल भी करबला के शहीदों की याद में एक तरही शब्बेदारी का इनेक़ाद अज़ाखाना कलां में अंजुमन ए गौहर ए अज़ा की जानिब से किया गया जिसमें सोजख्वानी शाहीर नक़ी राजे दालानी और उनके हमनवां ने की मजलिस को ख़िताब मौलाना एहतेशाम अली ने किया सदारत डॉक्टर नसीम उज़ ज़फ़र साहब ने की और निज़मत के फ्राइज़ ज़मन सिरसिवी और शाहदाब हुसैन मुश्तरका तौर दिए इसके बाद तरही शब्बेदारी शुरू हुई ।।ई शब्बेदारी का इनेक़ाद ।।

सिरसी सादात साल्हे गुज़िश्ता की तरह इम्साल भी करबला के शहीदों की याद में एक तरही शब्बेदारी का इनेक़ाद अज़ाखाना कलां में अंजुमन ए गौहर ए अज़ा की जानिब से किया गया जिसमें सोजख्वानी शाहीर नक़ी राजे दालानी और उनके हमनवां ने की मजलिस को ख़िताब मौलाना एहतेशाम अली ने किया सदारत डॉक्टर नसीम उज़ ज़फ़र साहब ने की और निज़मत के फ्राइज़ ज़मन सिरसिवी और शाहदाब हुसैन मुश्तरका तौर दिए इसके बाद तरही शब्बेदारी शुरू हुई ।।

मिसरा ए तरह था ।। निकल न पाएगी जिंदगी भी हुसैन के कारवां से आगे ।।
इस तरह पर मधु अंजुमनों ने तरही कलम पेश किया ।।
अंजुमनों को शब्बेदारी में क़ुरा अंदाज़ी के जरिए अंजुमन ए गौहर ए अज़ा की जानिब से तब्रुकात तक़्सीम हुए और एक कुरा करबला ए मुअल्ला की ज़ियारत का निकला गया जो शहंशाह अब्बास इब्ने बाहर हसन के नाम निकला जो कि अंजुमन ए गौहर ए अज़ा के साबिक़ सदर चौधरी हाशिम अली साहब के इसाल ए सवाब के लिए था ।।
इस मौक़े पर डॉक्टर नसीम उज़ ज़फ़र साहब कैप्टेन हसन आरिफ़ रियाज़ुल हसन मौलाना एहतेशाम मौलाना सुबहान नसीर हुसैन ज़मन सिरसिवी फ़ैज़न सरवर मौजूद रहे इख़्तेताम ए शब्बेदारी पर मौजूदा सदर चौधरी हसन आरिफ़ ने आजादारों का शुक्रिया अदा किया ।।
जनता और जनादेश न्यूज़ पत्र से
क्राइम रिपोर्टर मोहम्मद
यूसुफ सिरसी सम्भल
U.P




















