हाथी का साथी बनकर फिर से जीत की राह पर चलने के लिए तैयार है: गुलशेर सैफी
विगत चुनाव में भी गुलशेर सैफी का रहा है शानदार प्रदर्शन


मोहित कुमार शर्मा।
पाकबड़ा की प्रधानी पर राज कर चुकी सैफी बिरादरी के युवा नेता गुलशेर सैफी एक बार फिर से मुस्लिम दलित काम्बीनेशन को लेकर हाथी पर सवार होकर पाकबड़ा नगर पंचायत पर नीला परचम लहराने की तैयारी में जुट चुके हैं। 2017 में नगर पंचायत के चुनावी अखाड़े में अपने पहले चुनाव में दमदार प्रदर्शन करने वाले गुलशेर सैफी 2022 के चुनावी मुकाबले को अपने नाम करने की रणनीति में चुपचाप जुटे हुए हैं। बसपा नेता गुलशेर सैफी पार्टी के वफादार एवं अनुशासित सिपाही होने के साथ पाकबड़ा के युवाओं में खासे लोकप्रिय हैं। एक ओर जहां सैफी बिरादरी को वह 2017 के चुनाव में अपने इर्द गिर्द करने में कामयाब रहे थे, वहीं युवाओं की भी वह पहली पसंद बने थे। बसपा उन पर दांव लगाती है तो पिछले पांच वर्ष में उनके द्वारा किया गया ग्राउंड होमवर्क इस चुनाव में हाथी की चाल को तेज कर सकता है।पाकबड़ा नगर पंचायत के चुनावी अखाड़े में यूं तो सैफी बिरादरी से कई उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं तथा उनमें भी कुछ खासतौर पर गुलशेर सैफी के परिवार से भी हैं, लेकिन 2017 के चुनाव को संगठित तरीके से लड़कर गुलशेर सैफी ने दिखा दिया था कि सपा का सिंबल उनके परिवार में जाने के बाद भी वह अपने लोगों को अपने साथ रखने में किस हद तक कामयाब रहे थे। वर्ष 2017 के चुनाव में 1934 वोट हासिल करने का कारनामा उन्होंने करके दिखाया था। बिगत चुनाव में पाकबड़ा का दलित वोट बसपा से छिटक कर भाजपा की ओर चला गया था। जिसके चलते गुलशेर के विजयी अभियान पर ब्रेक लग गया था लेकिन दलितों की दूरी होने के बाद भी गुलशेर अपनी मृदु एवं सौम्य तथा मिलनसार छबि के सहारे अपने पक्ष में तकरीबन दो हजार वोटरों को लामबंद करने में सफल रहे। उनके नाम की चर्चा आज भी पाकबड़ा की सियासत में होती है। सूत्रों के अनुसार पार्टी के समक्ष वह सिंबल मिलने पर चुनाव में उतरने एवं जीतने का गणित प्रस्तुत कर चुके हैं तथा बसपा के अनुशासित सिपाही के रूप में पार्टी के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि वह इस दौरान सैफी बिरादरी का शतप्रतिशत समर्थन हासिल करने के लिए अपना फीडबैक लेने में जुटे हैं एवं उनके अपने लोग भी उनकी खुली दावेदारी का इंतजार बेसब्री से कर रहे हैं।





























