अपने बच्चों को सोशल मीडिया, मोबाइल से वक्त रहते दूर ना किया तो चौपट हो जाएगा देश का भविष्य: पत्रकार शहजाद अनवर शमसी
सोशल साइट्स फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब आदि पर अश्लील, फूहड़, अभद्र भाषा शैली की शॉर्ट वीडियो का बच्चों में इतना क्रेज बढ़ गया है कि अब बच्चे खाना भी बिना मोबाइल के खाना नहीं चाहते।

फसी उर रहमान बेग(संपादक)
आजकल सोशल मीडिया के बढ़ते क्रेज का शिकार अधिकतर बच्चे हो रहे हैं।हालत ये है कि बच्चों को आंख खुलते ही मोबाइल चाहिए, और सोते वक्त तक उनके मनोरंजन का साधन सिर्फ और सिर्फ मोबाइल ही रह गया है।

इन सोशल साइट्स पर आजकल जो कुछ भी परोसा जा रहा है, उससे बच्चे न सिर्फ आक्रामक हो राय हैं, बल्कि उनको ये ज्ञान तक नहीं की वो अपने बड़ों से अभद्र भाषा शैली का भी प्रयोग कर रहे हैं। खेल और प्रतिभाएं तो मानों इस मोबाइल की वजह से उनकी शून्य हो चुकी हैं। कभी कभी माता पिता को भी इस बात का अफसोस होता है कि उनका बच्चा आखिर ये सब कहां से सीख रहा है, ऐसा नहीं है कि अभिभावकों की ये कोशिश न हो कि वो अपने बच्चे को मोबाइल की लत से बचाना नहीं चाहते, लेकिन बच्चों के शारीरिक विकास की चिंता, बच्चों की जिद, और मनमानी के कारण अक्सर यही मोबाइल फिर से उनके हाथों में देने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
ऐसे में अगर एक छोटी सी कोशिश की जाए तो शायद काफी हद तक सुधार आ सकता है, मगर शर्त ये है कि इसकी कोशिश हर किसी को करनी होगी, और ये सोचकर संकल्प के साथ करनी होगी, कि हमें देश के हर बच्चे को मोबाइल के माध्यम से परोसी जा रही अश्लीलता, अभद्रता, फूहड़ता पर अंकुश लगाना है। करना सिर्फ इतना है कि हर रोज कम से कम 10 ऐसी शॉर्ट वीडियो की रिपोर्ट या ब्लॉक करना है जिसमें ऐसी सामग्री अपलोड की गई हो जिससे बच्चों पर ग़लत प्रभाव पड़ सकता हो। आज अगर इस तरह की शॉर्ट वीडियो को बढ़ावा अगर मिल रहा है तो उसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि हम उसका बायकॉट नहीं कर रहे, हम खुद उनमें रुचि लेकर उन्हें देखते हैं और ठहाका लगाते हैं। आजकल व्यूज, लाइक, कमेंट्स पाने के लिए सोशल मीडिया पर जो कुछ भी परोसा जा रहा है, वो सिर्फ आपको वक्त बर्बाद करने के साथ ही आपके बच्चे के भविष्य को भी बर्बाद करने की सबसे बड़ी वजह बनता जा रहा है। जगाए और आज ही इस पहल को शुरू कर दें। ऐसी साइट्स जहां ग़लत सामग्री परोसी गई हो उसको तुरंत ब्लॉक कर दें, साथ ही ऐसी शॉर्ट वीडियो की रिपोर्ट भी करें। मेरे निजी नजरिए में ये जनहित के लिए बहुत जरूरी है।





























