जन सेवा में मिलता है आत्मिक सुख तो आप धर्म निष्ठ हैं,बाबा संजीव आकांक्षी
नारद ऋषि आश्रम मुरादाबाद में,95 वा भंडारा संपन्न


(फसी उर रहमान बेग )। आश्रम के अध्यक्ष एवं प्रखर वक्ता बाबा संजीव आकांक्षी ने कहा कि ऐसे मनुष्य जिन्हें जन सेवा में आत्मिक सुख की प्राप्ति होती है, जिनका मन जन सेवा में लगता है, जिन्हें ऐसा लगता है कि जनता की सेवा करना है, आम जन की सेवा करना कोई बड़ा कार्य नहीं बल्कि मानव जीवन का एक प्रमुख दायित्व है, तो मानिये ऐंसा व्यक्ति वास्तविक धर्मनिष्ठ है. ऐंसे व्यक्तियों को एक मंच पर आकर जन कल्याण के कार्यों में निरंतर आगे रहना चाहिए।
बाबा आकांक्षी ने कहा कि भगवान ने मानव योनि में जन्म देकर यह तो तय कर दिया कि आप केवल भोगों के लिए उत्पन्न नहीं हुए हैं. केवल भोगों के लिए तो पशु-पक्षी ही उत्पन्न होते हैं. मनुष्य का जन्म जन्म-जन्मांतर के चक्र से, जन्म मृत्यु के चक्र से बाहर निकलकर अपनी आत्मिक उन्नति, मोक्ष की प्राप्ति और भगवत कृपा की प्राप्ति करना ही एकमात्र लक्ष्य है. केवल मानव जीवन में ही संभव है कि व्यक्ति आत्मोथान के साथ-साथ अपने परिचितों, संबंधियों, मित्रों एवं जन-सामान्य की सेवा करते हुए अन्य मनुष्यों के लिए भी प्रेरणा बन सके और यदि कोई व्यक्ति ऐसा कर रहा है तो यह मानिये कि वह मनुष्य योनि के अपने जन्म को सार्थक कर रहा है। जन सेवा हेतु अपनी-अपनी समर्थ के अनुसार व्यक्ति सेवा कर सकता है, यदि आप धन दे सकते हैं तो समय नहीं दें, सकते तो धन दें यदि आप धन नहीं दे सकते समय दे सकते हैं तो समय दीजिये, यदि आप दोनों ही नहीं दे सकते शारीरिक तौर पर भी सेवा नहीं कर सकते तो अपने विचारों से ऐसे लोगों को उत्प्रेरित करें, प्रेरणा प्रदान करें जो जन सेवा कार्य के लिए या तो लगे हैं या जिनमें जन कार्य में लगने की संभावनाएं हैं. इस प्रकार विचारों से ,धन से और तन से किसी भी प्रकार से आप सेवा करते हैं तो यह मानिए कि आप अपने मानव जीवन को सफल कर रहे हैं.
मंगल चिंतन के उपरांत भंडारे का आयोजन किया गया.
आज के आयोजन में प्रमुख रूप से सुरेंद्र सिंह, पंकज शर्मा, प्रमोद रस्तोगी, बृजपाल सिंह यादव, डॉ मनदीप सिंह राखी शर्मा, पुरुषोत्तम शर्मा, डॉली शर्मा, अमित कुमार, डॉक्टर सत्यवीर सिंह चौहान, मोहित अग्रवाल, विनय चौधरी आदि उपस्थित रहे.





























