संभल जिले की पुलिस चौकी में इरफान की मौत ,परिजनों ने लगाया पुलिस पर हत्या का आरोप
पुलिस ने युवक की हत्या की, सांसद जिया उर रहमान बर्क,दोषी पुलिस वालो पर मुकदमा दर्ज करने की मांग


Oplus_131072मोहम्मद यूसुफ(क्राइम रिपोर्टर)। वैसे तो पुलिस अभिरक्षा में मजलूमों की मौत का सिलसिला कोई अचंभे की बात नहीं है l योगी जी की पुलिस अब अपराधों को छोड़कर,लोगों को उधार या फिर झूठे आरोपों पे ही आम लोगों पर अत्याचार करने से बाज नहीं आ रही है l घटना संभल के नखासा थाने के राय सत्ती चौकी की है,एक युवक के खिलाफ आपसी लेनदेन को लेकर पुलिस से शिकायत की जाती है,चौकी के चार पुलिसवाले,एक दरोगा ,आरोप लगने वाले इरफान के घर आते है और उसे जबरन चौकी खींचकर ले जाते है,कुछ घंटे बात परिजनों को सूचना मिलती है कि इरफान की पुलिस चौकी में मौत हो गई l


परिजनों का आरोप – पुलिस के टॉर्चर करने से मौत हुई। परिजनों का पुलिस चौकी पर हंगामा। रुपयों के लेनदेन में पुलिस, इरफान को चौकी पर लाई थी।
संभल SP कृष्ण बिश्नोई ने कहा–
“इरफान को जब पूछताछ के लिए लाया गया तो उसका बेटा भी साथ था। उसने तबियत खराब होना बताया। पुलिस चौकी पर ही इरफान ने दवाई खाई। अचानक जमीन पर गिर पड़ा। परिजन हॉस्पिटल ले गए। रास्ते में मौत हो गई। इरफान हार्ट का मरीज था। संभवतः हार्टअटैक से मौत हुई” sp कृष्ण बिश्नोई की बात पर अगर मान भी लिया जाए तो क्या किसी को डरा,धमकाने की वजह अगर किसी व्यक्ति की मौत हो भी जाती है तो वह क्या अपराधिक श्रेणी में नहीं आता l और अगर आता है तो उन पर कार्रवाई होना लाज़िम है,कही ऐसा तो नहीं क्योंकि हत्या के जिम्मेदार उनकी पुलिस है,इसलिए उनके खिलाफ तुरंत एक्शन नहीं लिया गया l मृतक इरफान जिसकी हत्या का आरोप परिजनों द्वारा पुलिस पर लगाया गया है उस पर निष्पक्ष जांच होना चाहिए l
मानवता के आधार पर साफ हो गया कि युवक की मौत पुलिस टॉर्चर का ही नतीजा है,आम आदमी को पुलिस अचानक घर से उठा ले जाए,जाहिर है उसको हार्ट अटैक भी आ सकता है,जिसकी वजह से ऐसे हालात बने उन पर अपराध बनता है
मृतक एक गरीब पल्लेदार और बिना अपराधिक छवि वाला मजलूम इंसान था जो अपने पीछे 3 मासूम बच्चे,और एक पत्नी बेवा हो गई l सच तो यह कि एक परिवार का व्यक्ति अपने लिए जरूर अकेला होता है l लेकिन अपने परिवार के लिए पूरा संसार होता है,जिसके दुनिया से जाने के बाद लोग बदल जाते है,उसके परिवार के लिए उसकी कमी कभी पूरी नहीं होती,nishpaksh जांच होना चाहिए और अगर जांच में अगर पुलिस ही दोषी पाए जाए तो मानवता के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए l





























